А¤­а¤ѕа¤°а¤¤аґ‡а¤‚दഃ А¤їаґѓа¤— { Bhartendu Yug } А¤­а¤ѕа¤°а¤¤аґ‡а¤‚दഃ А¤їаґѓа¤— А¤•аґђ А¤µа¤їа¤¶аґ‡а¤·а¤¤а¤ѕ || А¤­а¤ѕа¤°а¤¤аґ‡а¤‚दഃ А¤їаґѓа¤— А¤•ഇ А¤°а¤ља¤ёа¤ѕа¤•а¤ѕа¤° Today

भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी, प्रेम मालिका, वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति

(निबंधकार) साहित्य सुमन, भट्ट निबंधावली

जीर्ण जनपद, आनंद अरुणोदय, मयंक महिमा

लेखकों ने समाज की कुरीतियों और ब्रिटिश शासन की विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया। भारतेंदु की 'अंधेर नगरी' इसका बेहतरीन उदाहरण है।

भारतेंदु युग वह सेतु है जिसने हिंदी साहित्य को मध्यकाल की श्रृंगारिकता से निकालकर आधुनिक काल की वास्तविकता और राष्ट्रीयता से मिलाया। इसी युग में हिंदी पत्रकारिता और नाटक जैसी विधाओं का वास्तविक विकास हुआ।

साहित्य में केवल राजा-रानियों की कहानियाँ नहीं, बल्कि बाल-विवाह, छुआछूत, सती प्रथा और नारी शिक्षा जैसे सामाजिक मुद्दों पर खुलकर लिखा गया।